MAD Indiaसंगीत, सितारे और पॉप कल्चर
मनोरंजन

मुकेश खन्ना का ‘रामायण’ और 'किरदार' पर फूटा गुस्सा: बोले ‘आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं!’

अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाने वाले एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में ‘रामायण’ और भारतीय इतिहास पर बन रही फिल्मों के मेकर्स को खरी-खरी सुना दी है. उन्होंने बड़े सितारों को किरदारों में फिट न होने पर भी जमकर निशाना साधा है. मुकेश खन्ना, जिन्हें हम 'शक्तिमान' के नाम से जानते हैं, उनका कहना है कि आज के फिल्म बनाने वाले किरदार के लिए सही एक्टर नहीं चुनते, बल्कि बस उसी को ले लेते हैं जो बाजार में 'बिकता' हो.

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ आने वाली है, और ऐसे में मुकेश खन्ना की ये बातें इस फिल्म की कास्टिंग से जोड़कर देखी जा रही हैं. उन्होंने बॉलीवुड बबल से बातचीत में साफ कहा कि आजकल फिल्मों में जब बड़े किरदारों की कास्टिंग होती है, तो मेकर्स ठीक से सोचते ही नहीं. उनकी सोच बस इतनी है कि अगर किसी एक्टर की पिछली फिल्म हिट हुई है, तो उसे साइन कर लो, इससे फिल्म का बजट तो निकल ही जाएगा. क्या बात है यार, बस पैसों का ही खेल है क्या?

एक्टर के मुताबिक, प्रोड्यूसर्स 300 करोड़ रुपये की लागत वसूलने की उम्मीद में बड़े सितारों को ले तो लेते हैं, लेकिन 700 करोड़ रुपये कमाने का सपना अधूरा ही रह जाता है. मजे की बात तो ये है कि कई बार तो फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से मिलने वाले पैसे के भरोसे एक्टर के साथ डील फाइनल कर ली जाती है. फिर जब फिल्म बनकर तैयार होती है, तो पता चलता है कि एक्टर उस रोल में तो कहीं से फिट ही नहीं बैठ रहा! न वो किरदार जैसा दिखता है, और न ही अपनी पुरानी इमेज से बाहर निकल पाता है.

'एक्टर चुनता है निर्माता, न कि निर्माता एक्टर को!'

मुकेश खन्ना ने इस बदले हुए कास्टिंग के तरीके पर अपनी नाराजगी भी जताई. उनका कहना है कि आजकल तो ऐसा लगता है जैसे एक्टर ही निर्माता को चुन रहा है, न कि निर्माता एक्टर को. अगर कोई स्टार मार्केट में अच्छा बिक रहा है, तो बस उसे फिल्म में ले लो. जबकि असल में तो निर्माता को ये सोचना चाहिए कि उस खास किरदार के लिए कौन सा कलाकार सबसे सही रहेगा, कौन उसे जी पाएगा.

उन्होंने एक बड़ा सवाल भी उठाया: जब छोटे कलाकारों के ऑडिशन लिए जाते हैं, तो फिर बड़े-बड़े सितारों का ऑडिशन क्यों नहीं होना चाहिए? मुकेश खन्ना का मानना है कि किसी एक्टर की लोकप्रियता से ज्यादा जरूरी है कि वो किरदार में कितना फिट बैठता है, उसकी पर्सनालिटी और लुक रोल से मैच करता है या नहीं.

शाहरुख खान और प्रभास पर भी बरसे

मुकेश खन्ना ने शाहरुख खान का उदाहरण देते हुए कहा कि वो कभी 'शक्तिमान' जैसे नहीं दिख सकते, क्योंकि उनकी अपनी एक अलग और मजबूत छवि है. उनका साफ कहना था कि किसी भी किरदार की कास्टिंग करते समय एक्टर की पिछली छवि का ध्यान जरूर रखना चाहिए. मेकर्स को ये देखना चाहिए कि एक्टर उस रोल जैसा दिखता है या नहीं, और उसकी पिछली पहचान कहीं नए किरदार के बीच में तो नहीं आ रही.

उन्होंने प्रभास का जिक्र करते हुए भी कहा कि कई फिल्मों में उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है. उनके मुताबिक, प्रभास जैसे बड़े स्टार को लेने के बावजूद किरदार के साथ न्याय नहीं हो पाता. मुकेश खन्ना ने यहां तक कह दिया कि प्रभास के मामले में तो उनकी मूंछें तक किरदार के बीच में आ गईं! मतलब, एक्टर की अपनी इमेज किरदार पर इतनी हावी हो गई कि वो रोल ही कहीं खो गया.

'करोड़ों लोगों की आस्था से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए'

आखिर में मुकेश खन्ना ने साफ शब्दों में कहा कि ‘रामायण’, ‘महाभारत’ और इतिहास से जुड़े किरदारों को निभाते समय सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. ये कोई हंसी-मजाक नहीं है, भाई! उनका तर्क है कि करोड़ों लोगों की आस्था इन किरदारों से जुड़ी हुई है. ऐसे में फिल्म निर्माताओं को सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और बड़े सितारों की लोकप्रियता के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि लोगों की भावनाओं और आस्था का भी सम्मान करना चाहिए.

मुकेश खन्ना की इस बेबाक राय ने एक बार फिर पौराणिक फिल्मों की कास्टिंग और बड़े सितारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अब सवाल यही है कि क्या सिर्फ एक बड़े स्टार की लोकप्रियता ही किसी पौराणिक किरदार को निभाने के लिए काफी है, या फिर ऐसे रोल के लिए एक्टर का चेहरा और व्यक्तित्व किरदार से सबसे ज्यादा मेल खाना चाहिए? आपको क्या लगता है?

सार्वजनिक स्रोतों, विकिपीडिया, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टिकटॉक से जानकारी के साथ।